पंचबली में श्वान, गाय, चींटी, कौवा और देवी-देवताओं के निमित्त भोजन निकालने का विधान
हरिद्वार, 4 अक्टूबर। श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों में पितरों के निमित्त तर्पण के साथ कौवे और गाय को भोजन कराने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध के दौरान कौवे और गाय को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दौरान घर में तैयार भोजन और पकवानों का एक हिस्सा पितरों के निमित्त निकालकर पहले कौवे और गाय को खिलाने, ब्राह्मणों को भोजन कराने तथा दान-पुण्य करने की परंपरा है।
पंचबली का है विशेष महत्व
नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोज के साथ पंचबली निकालने का विधान है। धार्मिक शास्त्रों में पंचबली के अंतर्गत श्वान, गाय, चींटी, कौवा तथा देवी-देवताओं के निमित्त भोजन निकालने की परंपरा बताई गई है। उन्होंने कहा कि इसे पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।
गाय को भोजन कराने की धार्मिक मान्यता
पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में गाय को विशेष महत्व दिया गया है। श्राद्ध पक्ष में गाय को हरा चारा, रोटी, चोकर, गुड़ और नमक खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि गाय को भोजन कराने से पितरों को शांति प्राप्त होती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
कौवे को भोजन कराने की परंपरा
उन्होंने बताया कि श्राद्ध पक्ष में कौवे को भोजन कराने की भी विशेष धार्मिक मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार कौवे को पितरों से जुड़ा प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि कौवे के माध्यम से पितरों तक भोजन पहुंचता है। इसी कारण श्राद्ध कर्म के दौरान भोजन का एक हिस्सा कौवे के लिए निकाला जाता है।
अन्नदान को माना गया शुभ
पंडित मनोज त्रिपाठी ने कहा कि श्राद्ध पक्ष में तर्पण, ब्राह्मण भोजन और पंचबली के साथ अन्नदान को भी शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में जरूरतमंदों को भोजन एवं अन्न का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
