संवाददाता : पुलिस दर्पण, हरिद्वार
हरिद्वार, 24 सितम्बर। उत्तराखंड में इन दिनों पीक आवर्स के दौरान लगभग 350 मेगावाट बिजली की कमी दर्ज की जा रही है। बिजली की बढ़ती मांग और उपलब्धता के बीच अंतर के कारण आवश्यकता पड़ने पर कुछ क्षेत्रों में आपातकालीन विद्युत कटौती करनी पड़ रही है। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक ने स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयला आधारित बिजली उत्पादन में कमी, पावर एक्सचेंजों से सीमित बिजली उपलब्ध होना तथा राज्य और केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से अपेक्षाकृत कम उत्पादन इस कमी के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयों के तकनीकी कारणों से बंद रहने से पीक आवर्स में करीब 100 मेगावाट क्षमता प्रभावित हो रही है।
नदियों में जल प्रवाह कम होने से जल विद्युत उत्पादन भी पिछले वर्ष की तुलना में घटा है। सितंबर 2025 की तुलना में इस वर्ष पीक आवर्स में राज्य और केंद्रीय जल विद्युत गृहों से औसतन 250 मेगावाट कम बिजली उत्पादन हो रहा है। वहीं, अधिकतम दरों पर भी पावर एक्सचेंजों से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ग्रिड की सुरक्षा को देखते हुए एनआरएलडीसी द्वारा ओवरड्रॉ की अनुमति भी सीमित रखी जा रही है।
यूपीसीएल प्रबंध निदेशक ने कहा कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर है, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सभी क्षेत्रीय इकाइयों में विशेष अनुरक्षण अभियान चलाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि नए निर्माण और परियोजना कार्यों के लिए अलग से बिजली आपूर्ति बाधित न की जाए, ताकि आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
