3,646 वाहनों के चालान से ₹47.90 लाख का प्रशमन शुल्क अर्जित, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
रुद्रप्रयाग, 08 अक्टूबर 2026। चारधाम यात्रा 2026 के दौरान यात्रा मार्गों पर स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग रुद्रप्रयाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में परिवहन विभाग ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से वाहन चालकों को 150 से अधिक डस्टबिन वितरित किए, ताकि यात्रा मार्गों पर कूड़ा फैलने से रोका जा सके और श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
वाहन चालकों को स्वच्छता के प्रति किया जागरूक
परिवहन विभाग द्वारा मंदाकिनी टैक्सी यूनियन के चालकों सहित अन्य वाहन चालकों को डस्टबिन वितरित किए गए। इसके अलावा वाहन चेकिंग के दौरान भी चालकों को डस्टबिन देकर स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। विभाग की इस पहल का उद्देश्य वाहन चालकों को जिम्मेदार बनाते हुए चारधाम यात्रा मार्गों पर कचरे के उचित निस्तारण को बढ़ावा देना है।
अधिकारियों ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रा मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। डस्टबिन के उपयोग से सड़क किनारे कूड़ा फेंकने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
3,646 वाहनों के चालान, ₹47.90 लाख का राजस्व
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) रुद्रप्रयाग धर्मेंद्र एस. बिष्ट ने बताया कि चारधाम यात्रा शुरू होने से अब तक परिवहन विभाग द्वारा 3,646 वाहनों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की गई है। इन कार्रवाइयों के माध्यम से ₹47 लाख 90 हजार का प्रशमन शुल्क अर्जित किया गया है।
उन्होंने कहा कि विभाग सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। वाहन चेकिंग के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ चालकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
पर्यावरण अनुकूल चारधाम यात्रा की अपील
एआरटीओ धर्मेंद्र एस. बिष्ट ने सभी वाहन चालकों से अपील की कि वे यात्रा के दौरान कूड़े का उचित निस्तारण करें और सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए विभाग के साथ-साथ वाहन चालकों और श्रद्धालुओं का सहयोग भी आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों से धार्मिक यात्रा मार्गों की स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
