कार्यशाला में पेंशन योजनाओं, दीर्घकालिक बचत और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
हरिद्वार, 28 अक्टूबर। दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डीआईसीसीआई) एवं पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के संयुक्त तत्वावधान में एमएसएमई उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। एक होटल में आयोजित इस कार्यशाला में उद्यमियों को पेंशन योजनाओं, वित्तीय सुरक्षा, दीर्घकालिक बचत और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक आत्मनिर्भरता के महत्व की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में डीआईसीसीआई के उत्तर भारत अध्यक्ष कुंवर शशांक, पीएफआरडीए के असिस्टेंट मैनेजर प्रशांत धरवाल, एसबीआई फंड से हिमांशु कुमार, यूटीआई से शुभलक्ष्मी तथा ईवाई से महम हैदर उपस्थित रहे।
एनपीएस की विशेषताओं और वित्तीय नियोजन पर चर्चा
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) की विशेषताओं, कार्यप्रणाली और दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उद्यमियों को नियमित बचत की आदत अपनाने तथा भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहने के लिए समय रहते प्रभावी वित्तीय योजना बनाने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि वित्तीय नियोजन केवल व्यक्तिगत भविष्य को सुरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उद्यमियों और उनके कर्मचारियों की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एमएसएमई क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी: कुंवर शशांक
डीआईसीसीआई के उत्तर भारत अध्यक्ष कुंवर शशांक ने एमएसएमई क्षेत्र में पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित आर्थिक भविष्य के लिए दीर्घकालिक बचत और उचित पेंशन योजना आवश्यक हैं। उद्यमियों को अपने व्यावसायिक विकास के साथ-साथ भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए।
उद्यमियों को पेंशन योजनाओं से जोड़ने की पहल
कार्यशाला में बताया गया कि डीआईसीसीआई की इस पहल का उद्देश्य एमएसएमई उद्यमियों को उपलब्ध वित्तीय योजनाओं, पेंशन सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें इन योजनाओं से जोड़ना है। इस प्रकार के आयोजन उद्यमियों को बेहतर वित्तीय निर्णय लेने और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहने में सहायक साबित हो सकते हैं।
अनेक उद्यमियों एवं गणमान्य लोगों ने की सहभागिता
कार्यशाला में राजेंद्र कुमार श्रमिक, गुरचरण सिंह, भानपाल रवि, दिनेश, भंवर सिंह, श्याम सुंदर, भारत भूषण, लक्ष्य कुमार, नरेश, वीरेंद्र श्रमिक, किशोर, धनेश छाछर, विनोद कुमार, नसीर अहमद, इंद्र, मनोज, परवीन, डॉ. के.पी. भोरे, अतुल सहित अनेक लोगों ने सहभागिता की।
