संस्कृत विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ 12वां दीक्षांत समारोह
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने मेधावियों को स्वर्ण पदक व उपाधियां प्रदान कीं, डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा और संस्कृत के संवर्धन पर दिया जोर
हरिद्वार, 26 सितम्बर 2026। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में शनिवार को 12वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 के 2,938 छात्र-छात्राओं को स्नातक, स्नातकोत्तर, शोध एवं अन्य उपाधियां प्रदान की गईं। दोनों सत्रों के 32 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया।
समारोह का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उत्तराखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने मुख्य अतिथि के रूप में मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारियों का आरंभ है।
डॉ. धन सिंह रावत रहे विशिष्ट अतिथि
समारोह में संस्कृत शिक्षा, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर बल देते हुए विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।
इन विशिष्ट अतिथियों की रही मौजूदगी
दीक्षांत समारोह में कई शिक्षाविद और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से उपस्थित अतिथियों में शामिल रहे—
- लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) – राज्यपाल एवं कुलाधिपति (मुख्य अतिथि)
- डॉ. धन सिंह रावत – संस्कृत शिक्षा, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री (विशिष्ट अतिथि)
- प्रो. रमाकांत पांडेय – कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय
- प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी – कुलपति, प्राज्योतिषपुर विश्वविद्यालय, गुवाहाटी (आधार भाषण)
- प्रो. रमेश कुमार पांडेय – पूर्व कुलपति
- दीपक कुमार – सचिव, संस्कृत शिक्षा, उत्तराखंड शासन
- दिनेश कुमार – कुलसचिव
- प्रो. मनोज किशोर पंत, डॉ. उमेश कुमार शुक्ल, संदीप कुमार सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक एवं शिक्षाविद।
चार विशिष्ट विभूतियों का हुआ सम्मान
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली चार विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। दो विद्वानों को डी.लिट. (मानद उपाधि), एक विद्वान को महामहोपाध्याय तथा एक विद्वान को कलाश्री सम्मान प्रदान किया गया।
विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
दीक्षांत समारोह में पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक शामिल हुए। उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों में उत्साह और गौरव का माहौल देखने को मिला। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
