राम-भरत मिलाप के दृश्य ने दर्शकों को किया भावविभोर, कलाकारों के अभिनय को मिली सराहना
हरिद्वार, 14 अक्टूबर। बड़ी रामलीला के रंगमंच पर नौका लीला, दशरथ मरण और भरत मिलाप के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय, सशक्त संवाद अदायगी और जीवंत प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास, पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने तथा राम-भरत मिलाप के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
मर्यादा, त्याग और भाईचारे का संदेश देती है रामलीला
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र चड्ढा ने कहा कि रामलीला समाज को मर्यादा, त्याग और भाईचारे का संदेश देती है। नौका लीला, दशरथ मरण और भरत मिलाप के प्रसंग हमें कर्तव्यनिष्ठा, प्रेम, त्याग और पारिवारिक मूल्यों का महत्व समझाते हैं।
श्री रामलीला संपत्ति कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील भसीन ने कहा कि रामलीला की प्रत्येक लीला अपने भीतर गहरा संदेश समेटे हुए है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
प्रेम और त्याग का प्रतीक है राम-भरत मिलाप
रामलीला संपत्ति कमेटी ट्रस्ट के मंत्री विनय सिंघल ने कहा कि प्रभु श्रीराम के अनुज भरत ने राजसत्ता से अधिक महत्व अपने भाई के प्रति प्रेम और सम्मान को दिया। यह प्रसंग सिखाता है कि रिश्तों की मजबूती पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और त्याग से कायम रहती है।
वहीं, रामलीला के प्रवक्ता डॉ. संदीप कपूर ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंग विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे श्रद्धालु और दर्शक
कार्यक्रम में कमेटी के महामंत्री महाराज कृष्ण सेठ, दादा गुरु भगवत शर्मा, रविकांत अग्रवाल, अंजना चड्ढा, कन्हैया खेवड़िया, ऋषभ मल्होत्रा, पवन शर्मा, राहुल वशिष्ठ, विशाल गोस्वामी, विकास सेठ, महेश गौड़, सुरेंद्र अरोड़ा, अनिल सखूजा, गोपाल छिब्बर, वीरेंद्र गोस्वामी, मनोज बेदी, सुनील वधावन और दिग्दर्शक मनोज सहगल सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
रामलीला के मंचन ने दर्शकों को धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक प्रेम, त्याग और आदर्श जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
