ठेका प्रथा समाप्त करने और श्रमिकों का उत्पीड़न रोकने की मांग
न्यूनतम वेतन व सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने की उठाई आवाज
हरिद्वार, 26 अक्टूबर। संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने उद्योगों में श्रम कानूनों के कथित उल्लंघन और श्रमिकों के उत्पीड़न पर चिंता जताई। रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, श्रमिक नेताओं पर दर्ज कथित झूठे मुकदमे वापस लेने और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग की।
श्रमिकों की आवाज दबाने का लगाया आरोप
इंकलाबी मजदूर केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी ने कहा कि फैक्ट्रियों में श्रमिकों की जायज मांगों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले श्रमिकों को कथित तौर पर झूठे मुकदमों में फंसाकर पुलिस के माध्यम से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले मजदूर नेताओं को डराने-धमकाने की कार्रवाई बंद होनी चाहिए।
न्यूनतम वेतन और ठेका प्रथा का मुद्दा उठाया
पंकज बवाड़ी ने कहा कि श्रमिक लंबे समय से न्यूनतम वेतन, सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार फैक्ट्री प्रबंधन श्रमिकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने और श्रमिकों के उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों की जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन जारी रहेगा।
इस दौरान दीपा ने भी श्रम कानूनों के पालन में कथित लापरवाही और श्रमिकों के उत्पीड़न की घटनाओं पर चिंता जताते हुए उनके अधिकारों की रक्षा और समस्याओं के समाधान की मांग की।
पत्रकार वार्ता में खेमानंद, रोहित, सुनील, आनंद, अवधेश, गोविंद, राजकिशोर, नीता, रजनी, अनिल सैनी सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
