सागर। (मध्य प्रदेश)सोमवार को पुलिस कंट्रोल रूम सागर में डायल-112 एफआरवी वाहनों पर ड्यूटी करने वाले पायलटों एवं स्टाफ को जीवन रक्षक सीपीआर(कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एवं बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण डायल-112 के नोडल अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर लोकेश कुमार सिन्हा की उपस्थिति में जिला अस्पताल सागर की डॉ. प्रीति तिवारी द्वारा आयोजित किया गया। जिले में तैनात सभी 36 डायल-112 एफआरवी वाहनों से जुड़े पुलिस स्टाफ एवं पायलटों ने इसमें भाग लिया|
प्रशिक्षण सत्र में सीपीआर तकनीक एवं रक्त संचार बहाल करने के व्यावहारिक तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. तिवारी ने दुर्घटना, हृदयाघात या अन्य आपात स्थितियों में पीड़ित को तत्काल राहत पहुंचाने के प्रदर्शन के माध्यम से समझाया। प्रतिभागियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई, जिससे वे व्यावहारिक रूप से इन तकनीकों को अपना सकें। यह प्रशिक्षण न केवल तकनीकी कौशल सिखाता है, बल्कि आपातकाल में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करता है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सिन्हा ने उपस्थित स्टाफ को संबोधित करते हुए कहा, पुलिस का दायित्व केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं एवं जीवन रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। किसी आपात स्थिति में त्वरित एवं संवेदनशील प्रतिक्रिया से एक जीवन बचाया जा सकता है। इसलिए, आज प्राप्त प्रशिक्षण को फील्ड में अधिकतम प्रभाव से लागू करें और आमजन की सहायता करें। उन्होंने स्टाफ को कर्तव्यों के प्रति सजग, संवेदनशील एवं सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।
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उद्देश्य-आपातकालीन घटनाओं में प्रथम प्रतिक्रिया के दौरान त्वरित जीवन रक्षक सहायता उपलब्ध कराना।
-घायल/पीड़ितों को अस्पताल पहुंचने से पूर्व आवश्यक प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करना।
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प्रशिक्षण का प्रभावइस प्रशिक्षण से डायल-112 स्टाफ अब अधिक दक्षता एवं आत्मविश्वास के साथ जीवन रक्षक भूमिका निभाने में सक्षम हो गया है। इससे सागर जिले में आपात सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, और पीड़ितों को समय पर सहायता मिल सकेगी। यह पहल पुलिस विभाग की मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
