2027 के अर्द्धकुंभ में अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान, सभी विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच समन्वय पर दिया जोर
हरिद्वार, 20 अक्टूबर। इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रोफेसर डॉ. नरेश चौधरी ने सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में कुंभ मेले में तैनात होने वाले पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों एवं प्रशिक्षु पुलिस कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया। इस दौरान उन्होंने मेले के सफल आयोजन, श्रद्धालुओं की सुविधा और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में अनुभवी एवं विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा कुंभ मेला पुलिस को प्रशिक्षित किया जा रहा है। डॉ. नरेश चौधरी पिछले चार दशकों से विभिन्न कुंभ, अर्द्धकुंभ मेलों और अन्य महत्वपूर्ण स्नान पर्वों में चुनौतीपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते आ रहे हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने आगामी अर्द्धकुंभ मेले की व्यवस्थाओं और संभावित चुनौतियों के बारे में पुलिस कार्मिकों को विस्तार से बताया।
डॉ. चौधरी ने कहा कि हरिद्वार में छह वर्ष के अंतराल पर अर्द्धकुंभ मेले का आयोजन होता है। उन्होंने बताया कि पिछले हरिद्वार कुंभ का आयोजन 12 वर्ष के बजाय 11 वर्ष के अंतराल पर हुआ था, जबकि उज्जैन में कुंभ मेला निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वर्ष 2028 में आयोजित होगा। वहीं, वर्ष 2027 में हरिद्वार के अर्द्धकुंभ के बाद जुलाई में नासिक में कुंभ मेले का आयोजन प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुंभ मेले में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में सभी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों को अत्यंत संवेदनशीलता, सतर्कता और कर्मठता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा।
डॉ. चौधरी ने कहा कि हरिद्वार में आयोजित होने वाले प्रमुख स्नान पर्वों को निर्विघ्न संपन्न कराने में स्थानीय निवासियों, दुकानदारों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, होटल एवं धर्मशालाओं के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। सभी की सक्रिय सहभागिता से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलती है।
उन्होंने मेला प्रशासन, मेला पुलिस और आयोजन से जुड़ी सभी संस्थाओं से आपसी सामंजस्य स्थापित करने तथा आवश्यकता के अनुसार स्थानीय लोगों एवं संगठनों का सहयोग लेने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय, संवेदनशील व्यवहार और जिम्मेदारी के साथ किए गए कार्यों से आगामी अर्द्धकुंभ मेले को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकेगा।
