बिछिया ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवरना में डीआईओएस के निरीक्षण के दौरान पूरे स्टाफ के गायब मिला और बच्चे स्कूल परिसर में खेलते दिखे। इसका वीडियो बनाकर डीआईओएस ने प्रचलित कर दिया।
प्रसारित वीडियो को संज्ञान लेकर बीएसए ने खुद मौके की जांच की और लापरवाही सामने आने पर प्रधान शिक्षक को निलंबित कर दिया, जबकि तीन सहायक शिक्षक और दो अनुदेशकों को सितंबर माह के वेतन व मानदेय से वंचित कर दिया। विद्यालय की अनियमितताओं पर बिछिया बीईओ से भी जवाब मांगा है।
जिला विद्यालय निरीक्षक सुनील दत्त गुरुवार को साढ़े आठ बजे नेवरना स्थित इंटर कालेज पहुंचे थे। इस दौरान उनकी नजर उच्च प्राथमिक विद्यालय के बाहर खेल रहे बच्चों पर पड़ी। उन्होंने स्कूल पहुंचकर व्याप्त कमियों का वीडियो भी बनाया।
इसमें एक छात्र सनी बता रहा है प्रधान शिक्षक श्रीनाथ यादव ने चाबी देकर समय से विद्यालय खोलने के लिए कहा है। अधिकारी ने पूछा कि स्कूल में कितने शिक्षक है तो छात्र ने बताया छह शिक्षक है, जिसमें कोई भी मौके पर नहीं मिला।
वीडियो में सभी कक्ष भी बंद मिले। वीडियो के प्रसारित होने के बाद बीएसए शैलेश कुमार पांडेय खुद स्कूल पहुंच गए और वहां शिक्षकों और बच्चों से पूछताछ की। बीएसए को स्कूल का भौतिक और शैक्षिक परिवेश अच्छा मिला।
इसकी उन्होंने तारीफ भी की, लेकिन शिक्षकों की अनुपस्थिति और बच्चों से स्कूल का ताला खुलवाने में प्रथम दृष्टया सभी को कसूरवार माना। इस पर बीएसए ने प्रधानध्यापक श्रीनाथ यादव को सस्पेंड किया। जबकि, सहायक शिक्षक आशुतोष मिश्र, मोना बनेजा, मंजू यादव, अनुदेशक मनीषा भारती, प्रमोद कुमार को वेतन व मानदेय से वंचित कर दिया।
राजनैतिक गलियारे में सरगर्मी
नेवरना उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रचलित वीडियो ने राजनैतिक गलियारे को भी गर्म कर दिया। एक्स पर विपक्षी पार्टियों ने भाजपा शासन में बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने खड़े कर दिए। कोई खराब मौसम में कुछ मिनट की लेटलतीफी पर शिक्षकों के समर्थन पर खड़ा रहा तो कोई शिक्षकों की गैरहाजिरी और बच्चों से ताला खुलने की हरकत से खफा रहा।
डीआईओएस संग जीआईसी प्रधानाचार्य की मौजूदगी पर भी सवाल
वीडियो में जिला विद्यालय निरीक्षक के साथ राजकीय इंटर कालेज उन्नाव के प्रधानाचार्य परमात्मा शरण भी दिख रहे है। इसके बाद लोग अपना स्कूल छोड़कर डीआईओएस के साथ निरीक्षण में मौजूद होने पर सवाल खड़े हो गए।
लोगों ने परिषदीय स्कूल में गैरहाजिर शिक्षकों पर हुई कार्रवाई को जहां सही माना, वहीं जीआईसी प्रधानाचार्य को साथ लेकर निरीक्षण करना और स्कूल की शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने पर डीआईओएस को भी जिम्मेदार ठहराया।
