प्रो. कृष्ण पाल सिंह ने नैनो टेक्नोलॉजी और बायोसेंसर पर किया रिसर्च… अब बने गोरखपुर विवि के नए कुलपति

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गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय से लंबे समय तक जुड़े रहे प्रो. कृष्ण पाल सिंह (केपी सिंह) को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने उनकी नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष के लिए की है। इससे पहले वह महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति रह चुके हैं।

प्रो. कृष्ण पाल सिंह वर्ष 2005 में पंतनगर विश्वविद्यालय से जुड़े थे। उन्होंने यहां बायोफिजिक्स में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला। बाद में प्रोफेसर के पद तक पहुंचे। उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज (सीबीएसएच) की बायोफिजिक्स यूनिट रहा। उन्होंने विश्वविद्यालय में बायो-नैनोटेक्नोलॉजी और नैनो-बायोसेंसर से जुड़े शोध को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पंतनगर में प्रो. सिंह का शोध क्षेत्र बायोफिजिक्स, नैनो टेक्नोलॉजी, नैनो-बायोसेंसर, नैनोमैटेरियल, आणविक निदान, लक्षित दवा वितरण और नैनो टॉक्सिसिटी जैसे विषयों तक विस्तृत रहा।

उन्होंने बायो – नैनोटेक्नोलॉजी एंड नैनोबिओसेंसर रिसर्च लैबोरेटरी के माध्यम से अत्याधुनिक शोध को बढ़ावा दिया। उनके शोध का एक महत्वपूर्ण पक्ष कृषि में नैनो तकनीक के उपयोग से भी जुड़ा रहा। नैनो-सिलिका में यूरिया को समाहित कर नैनो उर्वरक तैयार करने और फसलों पर उसके प्रभाव का अध्ययन भी उनके शोध कार्यों में शामिल रहा।
जीबी पंत-क्रैनफील्ड रिसर्च सेंटर के निदेशक भी रहे

वे गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में प्रोफेसर रहे। इसके अलावा 2014–2016 में उत्तराखंड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक तथा जीबी पंत-क्रैनफील्ड रिसर्च सेंटर के निदेशक भी रहे।

प्रो. सिंह ने नैनो-बायोसेंसर के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण शोध किए। ग्राफीन ऑक्साइड, नैनोपोरस मेम्ब्रेन और इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जैव-अणुओं की पहचान से जुड़े शोध में उनका योगदान रहा। कैंसर उपचार में लक्षित दवा वितरण और बायोमेडिकल नैनो टेक्नोलॉजी पर भी उनके शोध सामने आए हैं।

उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि रसायन विज्ञान और मेम्ब्रेन बायोफिजिक्स से जुड़ी है। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एमएससी, एमफिल और पीएचडी की। विदेशों में भी उन्होंने बायोमोलेक्यूल, नैनो सिग्नलिंग, टार्गेटेड ड्रग डिलीवरी और नैनो-बायोसेंसर से संबंधित शोध किया।

पंतनगर के बाद प्रो. सिंह ने विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। वह हरियाणा के कृषि विश्वविद्यालयों में कुलपति तथा महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति भी रहे। अब उन्हें गोरखपुर विश्वविद्यालय की कमान सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति से विश्वविद्यालय में नए नेतृत्व की शुरुआत होगी।

शिक्षा और शुरुआती करियर

प्रो. सिंह ने एमएससी, एमफिल और पीएचडी केमिस्ट्री में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से की। उनकी पीएचडी का क्षेत्र मेंबरने बियोफिजिक्स था। इसके बाद उन्होंने स्लोवाकिया की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ब्रतिस्लाव, क्रोटिया के रूडर बोस्कोविक् इंस्टिटूटे और यूके की क्रनफील्ड यूनिवर्सिटी में बिओमोलकुलेस, नैनोसिग्नाल्लिंग, तर्गेटेड ड्रग डेलिवरी तथा नैनोबिओसेंसराव से संबंधित शोध किया।

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