सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश भालों सहित प्राचीन व आधुनिक शस्त्रों की पूजा कर लिया धर्म-संस्कृति की रक्षा का संकल्प
हरिद्वार, 20 अक्टूबर। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक पर्व विजयदशमी के अवसर पर कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में संतों ने विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के नेतृत्व में संतों ने अखाड़े के आराध्य देवता सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश के भालों सहित अन्य प्राचीन एवं आधुनिक शस्त्रों का पूजन किया। इस दौरान संतों ने सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया।
शस्त्र पूजन का अनुष्ठान पंडित अवधेश शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया। इस अवसर पर अखाड़े के संत-महंत उपस्थित रहे और पारंपरिक धार्मिक विधियों का निर्वहन किया।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश अखाड़े के आराध्य देवता हैं। प्राचीन परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष विजयदशमी पर अखाड़े के देवताओं के साथ अखाड़े के प्राचीन एवं आधुनिक शस्त्रों का पूजन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि बुराई का अंत करने और धर्म की रक्षा के लिए ज्ञान के साथ शक्ति भी आवश्यक है। आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्म की रक्षा के उद्देश्य से नागा संन्यासियों को संगठित कर अखाड़ों की स्थापना की थी। उन्होंने शास्त्र ज्ञान के साथ शस्त्र ज्ञान की परंपरा को भी महत्व दिया। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए नागा संन्यासियों ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र धारण किए और विभिन्न ऐतिहासिक परिस्थितियों में आक्रांताओं का मुकाबला किया।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि विजयदशमी का पर्व हमें धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। अखाड़ों में शस्त्र पूजन की परंपरा धर्म और संस्कृति की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है।
ये संत रहे मौजूद
इस अवसर पर महंत कैलाश भारती, श्रीमहंत मनोज गिरि, महंत विनोद गिरि उर्फ हनुमान बाबा, स्वामी ज्ञान भारती, स्वामी हरिशंकर गिरि, स्वामी किशनपुरी, स्वामी कुंदन पुरी महाराज सहित अखाड़े के अनेक संत-महंत उपस्थित रहे।
